नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मलेशिया की दो दिनों की आधिकारिक यात्रा में जारी भारत-मलेशिया संयुक्त वक्तव्य में दोनों देशों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहराई देने तथा सहयोग के सभी प्रमुख क्षेत्रों में संबंधों के विस्तार की प्रतिबद्धता दोहराई।
दोनों देशों के ओर से जारी संयुक्त वक्तव्य के अनुसार, यह यात्रा भारत और मलेशिया के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संपर्कों, मजबूत जन-जन के रिश्तों और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित मित्रता को नई दिशा देने वाली रही। दोनों देशों ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, डिजिटल, ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और क्षेत्रीय-वैश्विक मुद्दों सहित द्विपक्षीय सहयोग को व्यापक रूप से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
वक्तव्य में कहा गया कि वर्ष 1957 में राजनयिक संबंधों की स्थापना के बाद से भारत और मलेशिया के रिश्ते आपसी सम्मान, साझा हितों और लोकतांत्रिक परंपराओं पर आधारित रहे हैं। अगस्त 2024 में द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था, जिसे मौजूदा यात्रा में और सुदृढ़ किया गया। दोनों पक्षों ने नियमित उच्चस्तरीय संवाद, विदेश कार्यालय परामर्श और संयुक्त आयोग बैठकों को द्विपक्षीय सहयोग की मजबूत आधारशिला बताया तथा संसदीय आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
व्यापार और निवेश को संबंधों का प्रमुख आधार बताते हुए दोनों नेताओं ने सेमीकंडक्टर, डिजिटल अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचा, नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, स्वास्थ्य, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक, स्टार्टअप और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को मलेशियाई कंपनियों के लिए एक प्रमुख निवेश गंतव्य बताया, जबकि प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने मलेशिया में भारतीय कंपनियों की मजबूत उपस्थिति और उच्च कौशल रोजगार सृजन में उनके योगदान की सराहना की। दोनों देशों ने मलेशिया-भारत व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते और आसियान-भारत व्यापार समझौते की समीक्षा को समयानुकूल और पारस्परिक रूप से लाभकारी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान को बढ़ावा देने के प्रयासों की भी सराहना की गई।
खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र में स्थिर, टिकाऊ और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण पर सहमति बनी। मलेशिया ने सतत पाम ऑयल का विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता बने रहने की प्रतिबद्धता दोहराई और दोनों पक्षों ने पाम ऑयल वैल्यू चेन में उच्च मूल्य वर्धित उत्पादों के विकास पर सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया।
डिजिटल और वित्तीय सहयोग के तहत भारत-मलेशिया डिजिटल परिषद के गठन का स्वागत किया गया, जिससे फिनटेक, साइबर सुरक्षा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उभरती तकनीकों में साझेदारी को मजबूती मिलेगी। यूपीआई और मलेशिया के डिजिटल भुगतान नेटवर्क के बीच सहयोग से पर्यटन, छात्रों और छोटे कारोबारियों के लिए लेन-देन को आसान बनाने पर सहमति बनी।
संयुक्त वक्तव्य में ऊर्जा क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और सौर ऊर्जा परियोजनाओं में सहयोग को गति देने पर जोर दिया गया। सेमीकंडक्टर उद्योग को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताते हुए दोनों देशों ने तकनीकी नवाचार, कौशल विकास और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए संयुक्त प्रयासों पर सहमति जताई।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग के तहत दोनों नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा करते हुए शून्य सहनशीलता की नीति दोहराई। सैन्य अभ्यास, रक्षा संवाद, समुद्री सहयोग और आतंकवाद निरोधक प्रयासों को और मजबूत करने पर सहमति बनी। भारत-मलेशिया संयुक्त सैन्य अभ्यास और नौसैनिक संपर्कों को द्विपक्षीय रक्षा संबंधों का अहम हिस्सा बताया गया।
शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, संस्कृति और पर्यटन के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी दोनों देशों की सहमति बनी। छात्रों, पेशेवरों और कामगारों की आवाजाही को सरल बनाने, पर्यटन को बढ़ावा देने और हवाई संपर्क मजबूत करने पर जोर दिया गया। पारंपरिक चिकित्सा, आपदा प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण में सहयोग को भी संयुक्त वक्तव्य में प्रमुखता दी गई।
क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने, बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के समर्थन की प्रतिबद्धता जताई। मलेशिया ने भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता का स्वागत किया, जबकि भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए मलेशिया के समर्थन की सराहना की।
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