औषधीय उत्पादों की वैश्विक मांग बढ़ने के साथ भारत इन सप्लाई चेन में अग्रणी बनने की ओर अग्रसर : प्रतापराव जाधव

बुलढाणा (महाराष्ट्र) : केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने गुरुवार को कहा कि औषधीय उत्पादों की वैश्विक मांग बढ़ने के साथ भारत इन सप्लाई चेन में अग्रणी बनने की ओर अग्रसर है। शेगांव में चल रहे राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 में ग्रामीण सशक्तिकरण के लिए औषधीय खेती सत्रों को संबोधित करते हुए प्रतापराव जाधव ने कहा कि किसानों को उच्च-मूल्य वाली औषधीय फसलों—सफेद मूसली, हल्दी, अदरक, अश्वगंधा और एलोवेरा—को सामान्य फसलों के साथ जोड़ना चाहिए, जिससे आय दोगुनी हो सकती है। उन्होंने औषधीय पौध संगठनों, आयुष के अधीन राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड , और वन विभाग के साथ 5-10 प्रतिशत औषधीय प्रजातियों को वनीकरण में शामिल करने के सहयोग की जानकारी दी। उन्होंने कहा, “विस्तृत गाइड और पौधे ई चरक पर उपलब्ध हैं—किसान आज से शुरू करें।”

 

इस मौके पर मेले में महत्वपूर्ण विकास के रूप में किसानों, आपूर्तिकर्ताओं और निर्माताओं के बीच औषधीय पौध फसलों के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। ये समझौते सुनिश्चित खरीद, स्थिर मूल्य, गुणवत्ता मानक और सुचारू सप्लाई चेन सुनिश्चित करेंगे, जिससे बड़े पैमाने पर खेती और मूल्यवर्धन को प्रोत्साहन मिलेगा।

 

 

 

चार दिवसीय इस भव्य आयोजन में, आयुष मंत्रालय द्वारा शेगांव में आयोजित, निःशुल्क सामान्य स्वास्थ्य जांच, योग्य विशेषज्ञों से परामर्श, प्रामाणिक आयुष दवाओं का वितरण, औषधीय पौधों और उत्पादों पर इंटरैक्टिव प्रदर्शनियां, जीवंत योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा प्रदर्शन, अकादमिक-उद्योग सेमिनार, किसान-केंद्रित खेती सत्र और सामुदायिक जागरूकता अभियान शामिल हैं। ये गतिविधियां स्वास्थ्य पेशेवरों, शोधकर्ताओं, निर्माताओं, किसानों, संस्थानों और नागरिकों के बीच महत्वपूर्ण संवाद को बढ़ावा देती हैं। आयुष चिकित्सकों ने आयुर्वेद-प्रेरित उपचार प्रदान किए, साथ ही चश्मों का वितरण और रेफरल सुविधा दी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के वंचित लोगों पर बोझ कम हुआ।

 

जाधव ने कहा कि आरोग्य मेला सिर्फ एक आयोजन नहीं—यह सहयोग से आयुष को बढ़ाने वाला आंदोलन है। उत्साही भीड़, जीवंत स्टॉल, नीतिगत घोषणाएं और व्यावहारिक पहल जैसे एमओयू के साथ मेला निरंतर गति पकड़ रहा है।

 

इस मौके पर आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया ताकि वे रोजमर्रा की रसोई की चीजों—जैसे हल्दी (सूजन के लिए), अदरक (पाचन के लिए), तुलसी (प्रतिरक्षा के लिए)—का उपयोग आयुर्वेदिक घरेलू उपचारों में कर सकें। उन्हें लोकप्रिय नारे “आजी बाई का बटुआ” (दादी का थैला सबके इलाज रखता है) के बारे में बताया गया ताकि वे आयुष उपचार पद्धतियों के बारे में घर घर जा कर बताए। उन्हें खान-पान में सुधार” (सचेत भोजन) और अनुशासित जीवनशैली जैसे जल्दी सोना, जल्दी उठना—की वकालत की ताकि मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी जीवनशैली की बीमारियों पर अंकुश लगाया जा सके।

 

आयोजन के तीसरे दिन दिव्यांगजनों के लिए समर्पित सहायता होगी, जिसमें निःशुल्क व्हीलचेयर, प्रोस्थेटिक पैर/हाथ का वितरण और मौके पर फिटिंग शामिल है। चौथे दिन तक नेत्र जांच और संबंधित सेवाएं जारी रहेंगी।

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