नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव से दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका बन गई है। इस सैन्य तनाव के कारण भारत के इकोनॉमिक ग्रोथ पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। फाइनेंशियल इनफॉरमेशन सर्विस मुहैया कराने वाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेटिंग जारी करने वाली एजेंसी फिच ग्रुप की इकाई बीएमआई ने अपनी ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया के सैन्य तनाव के कारण भारत का आर्थिक विकास प्रभावित हो सकता है। इसके साथ ही इस जियो पॉलिटिकल टेंशन के कारण निवेशकों का सेंटीमेंट भी प्रभावित हो सकता है। ऐसा होने से यूरोपीय यूनियन समेत कई देशों के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) और अमेरिका के साथ होने वाली संशोधित ट्रेड डील से भारत को मिलने वाला लाभ भी आंशिक रूप से प्रभावित हो सकता है।
बीएमआई की ताजा इंडिया आउटलुक रिपोर्ट में अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर का अनुमान सात प्रतिशत के स्तर पर ही बनाए रखा है। एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2026 में अभी तक नीतिगत अनिश्चितता तुलनात्मक तौर पर नियंत्रण में रही है, लेकिन अब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू हो जाने तथा ईरान द्वारा खाड़ी के देशों पर जवाबी हमला करने की वजह से हालात तेजी से बदलते हुए नजर आ रहे हैं।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया के सैन्य तनाव के कारण नीतिगत अनिश्चितता बढ़ सकती है। इस संघर्ष में जैसे-जैसे तेजी आएगी, वैसे-वैसे नीतिगत अनिश्चितता में भी और तेजी आएगी। इससे दुनिया भर में निवेशक हतोत्साहित होंगे, जिसका असर भारत में होने वाले निवेश पर भी साफ-साफ पड़ेगा। निवेश में गिरावट आने से यूरोपीय यूनियन और अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार समझौते से मिलने वाले संभावित लाभ पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर लगातार हमले किए। इसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई समेत कई प्रमुख नेताओं की मौत हो गई। इस हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों तथा दुबई और दोहा जैसे ग्लोबल बिजनेस हब को भी ड्रोन और मिसाइल हमले के जरिए निशाना बनाया। इसके अलावा ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले माल वाहक जहाजों को भी संभावित हमले की चेतावनी दी है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज नाम का यह जलडमरूमध्य पूरी दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई के लिए प्रमुख मार्ग माना जाता है। बीएमआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर हॉर्मुज से होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई ठप होती है, तो इससे एनर्जी सेक्टर काफी प्रभावित होगा। खासकर, कच्चे तेल की कीमत में जोरदार इजाफा हो सकता है। ऐसा होने पर भारत की आर्थिक विकास दर में 0.50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।
करीब 33 किलोमीटर लंबे स्टेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है। पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव बढ़ने के बाद ईरान ने माल वाहक जहाजों को इस रास्ते से दूर रहने की चेतावनी दी है। इस चेतावनी के बाद बीमा कंपनियां ने भी इस रास्ते से गुजरने वाले माल वाहक जहाजों से इंश्योरेंस कवरेज वापस लेने का ऐलान किया है, जिसकी वजह से भारत समेत कई देशों के लिए इस रास्ते से होकर गुजरने वाले तेल टैंकर की आवाजाही भी प्रभावित हुई है।
बीएमआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमत बढ़ने और स्टेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते उसकी सप्लाई प्रभावित होने से भारत को बड़े आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ सकता है। इसका परिणाम भारत के आर्थिक विकास पर भी पड़ सकता है।
हालांकि इसी रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि भारत ने कई देशों के साथ हाल में ही ट्रेड डील को अंतिम रूप दिया है। इन ट्रेड डील्स के कारण भारत के इकोनामिक ग्रोथ को सकारात्मक लाभ मिल सकता है। बीएमआई की रिपोर्ट में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बनी सहमति का भी जिक्र किया है गया है। इस ट्रेड डील के लिए हुए अंतरिम समझौते में अमेरिका ने भारत पर लादे गए टैरिफ को घटा कर 18 प्रतिशत करने की बात को लेकर सहमति जताई। इसी बीच अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को रद्द करने का आदेश भी दे दिया।
कोर्ट के इस फैसले के बाद अमेरिका ने 24 फरवरी से सभी देशों पर अगले 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत का नया टैरिफ लागू करने का ऐलान किया। इसके अगले ही दिन 25 फरवरी को राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ को 15 प्रतिशत तक बढ़ाने की बात भी कहीं। हालांकि टैरिफ को 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ाने की बात को लेकर अभी औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।
अमेरिका और भारत के ट्रेड डील के अलावा भारत ने यूरोपीय यूनियन और कुछ अन्य देशों के साथ भी हाल में ही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) करने में सफलता हासिल की है, जिसकी कानूनी मंजूरी के बाद अगले एक साल की अवधि में पूरी तरह से लागू कर दिए जाने की उम्मीद की जा रही है। बीएमआई की रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर ये व्यापार समझौते सफलतापूर्वक लागू हो जाते हैं, तो इससे भारत की जीडीपी ग्रोथ की संभावनाएं मौजूदा अनुमान से ऊपर जा सकती हैं। हालांकि ट्रेड डील की वजह से भारत के जीडीपी ग्रोथ पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव का असर काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि पश्चिम एशिया में शुरू हुआ सैन्य तनाव कब तक जारी रहता है और इसका कच्चे तेल की सप्लाई पर किस हद तक असर पड़ता है।
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