नई दिल्ली : केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच निर्यातकों को मदद देने के लिए सरकार बीमा समर्थन जैसी नई योजनाएं शुरू करने की संभावना तलाश रही है। उन्होंने कहा कि सरकार निर्यातकों को सहायता के लिए सभी तरीकों का इस्तेमाल करेगी।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आहार अंतरराष्ट्रीय भोजन और आतिथ्य मेला के 40वें संस्करण के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के खाद्य और कृषि उत्पादों, जिनमें कृषि उपज और मत्स्य पालन शामिल हैं, उसका निर्यात सालाना लगभग 5 लाख करोड़ रुपये (55 अरब डॉलर से अधिक) तक पहुंच गया है, जिससे देश विश्व में कृषि उपज का सातवां सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है।
उन्होंने कहा कि हम निर्यातकों की मदद के लिए बीमा समर्थन जैसी कुछ नई योजनाएं विकसित करने पर भी विचार कर रहे हैं। इस बारे में ईसीजीसी और अन्य विभागों से चर्चा की जा रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि एक अंतर-मंत्रालयी समूह पश्चिम एशिया संकट से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है। साथ ही निर्यातकों के साथ लगातार संपर्क में है। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा अब तक किए गए नौ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) ने भारतीय उत्पादों के लिए निर्यात के बड़े अवसर खोले हैं।
गोयल ने कहा कि हम अब कनाडा के साथ एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे रहे हैं। इसके अलावा पश्चिम एशिया के छह देशों के समूह खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के साथ भी चर्चा शुरू हुई है। गोयल ने कहा कि यह सब कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए बड़े अवसर प्रदान करता है। वाणिज्य मंत्री ने कहा कि सरकार उन निर्यातकों की मदद के उपाय तलाश रही है, जिनका माल भेजा जा चुका है, लेकिन मौजूदा हालात के कारण उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार चौबीसों घंटे हालात पर नजर रखे हुए है। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच लगातार जारी हमलों से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है, जिससे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। यह संकट भारतीय निर्यातकों के लिए इस लिहाज से अहम है कि भारत के लिए पश्चिम एशिया प्रमुख निर्यात बाजारों में से एक है। उन्होंने कहा कि भारत को कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष निर्यातकों में शामिल होने का लक्ष्य रखना चाहिए। भारत फिलहाल दुनिया का सातवां सबसे बड़ा निर्यातक है।
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