बढ़ती जनसंख्या पर कानून की जरूरत, बचत अभियान को जनसंख्या नियंत्रण से जोड़ें : शांता कुमार

शिमला : पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पश्चिम एशिया संकट के चलते देशवासियों से हर क्षेत्र में बचत करने का आह्वान किया गया है। उन्होंने खुशी जताई कि पूरे देश में बचत अभियान को व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिससे तेल और गैस संकट से निपटना आसान होगा।

 

उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे अमीर पांच देशों में शामिल हो चुका है, लेकिन जनसंख्या विस्फोट के कारण देश में गरीबी, बेरोजगारी और आर्थिक विषमता लगातार बढ़ रही है। एक ओर अमीरी चमक रही है तो दूसरी ओर गरीब वर्ग बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि बेरोजगारी और गरीबी के कारण युवाओं में निराशा बढ़ रही है, जिससे आत्महत्याओं और अपराध की घटनाओं में भी वृद्धि हो रही है।

 

शांता कुमार ने सोमवार को एक बयान में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा तीसरे बच्चे पर 30 हजार रुपये और चौथे बच्चे पर 40 हजार रुपये देने की घोषणा पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश को आबादी बढ़ाने नहीं बल्कि जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

 

उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में भारत की आबादी लगभग 35 करोड़ थी, जो आज बढ़कर 145 करोड़ के करीब पहुंच चुकी है और हर वर्ष लगभग 2 करोड़ की वृद्धि हो रही है। इसके चलते सड़कों पर भीड़, दुर्घटनाएं, अस्पतालों में लंबी कतारें तथा गरीबी और बेरोजगारी जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।

 

शांता कुमार ने कहा कि दक्षिण भारत के कुछ राज्यों को आशंका है कि कम जनसंख्या के कारण भविष्य में लोकसभा सीटों की संख्या प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से कुछ नेता आबादी बढ़ाने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवल एक-दो लोकसभा सीटों के लिए देश को जनसंख्या विस्फोट की ओर धकेलना उचित नहीं है।

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