नई दिल्ली : विश्व शतरंज महासंघ (फिडे) की एथिक्स एंड डिसिप्लिनरी कमीशन (ईडीसी) ने पूर्व विश्व चैंपियन व्लादिमीर क्रामनिक पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए दो वर्ष का प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि, इसमें से अंतिम एक वर्ष का प्रतिबंध तीन वर्ष की परिवीक्षा (प्रोबेशन) अवधि के लिए निलंबित रहेगा। ऐसे में यदि क्रामनिक प्रोबेशन के दौरान किसी नए उल्लंघन के दोषी नहीं पाए जाते हैं, तो उन्हें केवल एक वर्ष का सक्रिय प्रतिबंध झेलना होगा।
यह मामला फिडे प्रबंधन बोर्ड और फिडे फेयर प्ले आयोग द्वारा दायर शिकायतों के बाद शुरू हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि क्रामनिक ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर ग्रैंडमास्टर डेविड नवारा, दिवंगत ग्रैंडमास्टर डेनियल नारोडिट्स्की सहित कई खिलाड़ियों पर बिना पर्याप्त आधार के सार्वजनिक रूप से चीटिंग के आरोप लगाए।
फिडे की ईडीसी ने सभी पक्षों की दलीलों और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद क्रामनिक को फिडे एथिक्स कोड और डिसिप्लिनरी कोड के कई प्रावधानों का उल्लंघन करने का दोषी पाया। आयोग ने माना कि उनके आचरण ने खिलाड़ियों की गरिमा, सम्मानजनक व्यवहार, साइबर बुलिंग, मानसिक उत्पीड़न, आदर्श खिलाड़ी की जिम्मेदारी तथा फेयर प्ले आयोग की जांच में सहयोग न करने जैसे नियमों का उल्लंघन किया। साथ ही उन पर बिना पर्याप्त प्रमाण के सार्वजनिक आरोप लगाने का भी दोष सिद्ध हुआ।
हालांकि, आयोग ने ईमानदारी, जवाबदेही और फिडे की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने से जुड़े कुछ अन्य आरोपों को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में खारिज कर दिया।
अपने फैसले में ईडीसी ने कहा कि शतरंज में चीटिंग के खिलाफ कार्रवाई फिडे की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है, लेकिन ऐसे आरोप केवल फिडे की गोपनीय जांच प्रक्रिया और पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर ही लगाए जाने चाहिए। बिना संस्थागत पुष्टि के किसी खिलाड़ी पर सार्वजनिक रूप से संदेह जताना उसकी प्रतिष्ठा और मानसिक स्थिति को नुकसान पहुंचा सकता है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला क्रामनिक की कथित एंटी-चीटिंग पद्धति की वैज्ञानिक वैधता पर नहीं, बल्कि आरोपों को सार्वजनिक रूप से पेश करने के तरीके और उससे शतरंज समुदाय पर पड़े प्रभाव के आधार पर दिया गया है।
प्रतिबंध के अलावा ईडीसी ने क्रामनिक को 12 महीने तक बिना पारिश्रमिक के शतरंज समुदाय के हित में सेवा करने का भी निर्देश दिया है।
फिडे के नियमों के अनुसार, क्रामनिक इस फैसले के खिलाफ 21 दिनों के भीतर फिडे एथिक्स एंड डिसिप्लिनरी कमीशन की अपील पीठ में अपील कर सकते हैं।
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