‘भारतीय सीमा में 60 KM अंदर घुसी चीनी सेना?’ सोशल मीडिया का दावा निकला महा-फर्जी, PIB फैक्ट चेक में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर एक वायरल दावा तेजी से फैल रहा है कि चीनी सेना भारत की सीमा के भीतर 60 किलोमीटर तक घुस आई है। खासतौर पर अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबांसरी जिले के तक्सिंग क्षेत्र में चीनी सेना के इस कथित घुसपैठ और नए कैंप बनाने की खबरें लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हैं। इस खबर के मुताबिक, चीनी सैनिक भारत-चीन सीमा से इतनी अंदर घुस आए हैं कि वे भारतीय सीमा से करीब 60 किलोमीटर दूर तक पहुंच गए हैं। इससे देशभर में चिंता और सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

लेकिन क्या ये दावा सच है? सरकार और संबंधित एजेंसियों ने इस खबर को खारिज कर दिया है। पीआईबी (प्रधान सूचना कार्यालय) के तथ्य जांच (PIB Fact Check) ने इस वायरल दावे को पूरी तरह फर्जी बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे वीडियो का भारत-चीन सीमा से कोई संबंध नहीं है। पीआईबी ने अपने बयान में कहा, “यह दावा फर्जी है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो भारत-चीन सीमा से संबंधित नहीं हैं और इनका इस दावे से कोई लेना-देना नहीं है।”

 

सरकार ने आगाह किया है कि सीमा सुरक्षा जैसे संवेदनशील मामलों में कोई भी जानकारी केवल आधिकारिक और सत्यापित स्रोतों से ही ली जानी चाहिए। अक्सर अपुष्ट वीडियो या पोस्ट पुराने हो सकते हैं, या किसी दूसरे देश या घटना से जुड़े हो सकते हैं, जिन्हें नए संदर्भ में पेश किया जाता है। इससे न केवल भ्रम फैलता है, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर भी गलतफहमी पैदा हो सकती है।

 

बात करें असली खबर की तो, पिछले दिनों भारत-तिब्बत सीमा पर चीन की ओर से नई सड़क बनाने का खुलासा हुआ था। यह सड़क उस विवादित क्षेत्र में स्थित है, जिसे 1959 से चीन का नियंत्रण माना जाता है। वर्तमान में, यह क्षेत्र वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पार है। ताजा सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि चीन ने इस क्षेत्र में नई सड़कें और बस्तियों का निर्माण किया है, जिनमें हेलिपैड और सीमेंट प्लांट जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। ये बस्तियां 2021 में बसे गए एक गाँव को 2026 में विकसित की गई नई बस्ती से जोड़ती हैं।

 

भारत सरकार ने इन चीनी गतिविधियों को लेकर कहा है कि इस क्षेत्र में सीमा का औपचारिक निर्धारण नहीं है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और भारतीय सेना का मानना है कि इस तरह की घटनाएं ‘ट्रांसग्रेशन’ कहलाती हैं, यानी दोनों पक्षों की सीमाओं के दावे और गश्त के बीच कभी-कभी सीमा पर पहुंच जाते हैं। इसे घुसपैठ नहीं कहा जाना चाहिए।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पर चीन का तेजी से बुनियादी ढांचा विकसित करना भारत के लिए रणनीतिक चुनौती है। इसीलिए भारत भी अरुणाचल प्रदेश में सड़क, सुरंग और अन्य अवसंरचना परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

 

पीआईबी ने यह भी कहा है कि कई बार सही जानकारी को भी अलग संदर्भ में पेश कर गलत धारणा बना ली जाती है। यदि आप भी किसी संदिग्ध वीडियो, फोटो या दावे का सामना करें, तो उसे बिना सत्यापन के आगे साझा न करें। स्रोत की जांच करें और देखें कि किसी आधिकारिक एजेंसी ने उस पर कोई जानकारी दी है या नहीं। गलत जानकारी न फैलाने में ही समझदारी है, क्योंकि इससे अफवाहें फैलने से देश की सुरक्षा पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

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