सैन फ्रांसिस्को : साइबर सुरक्षा की दुनिया में भारतीय मूल के शोधकर्ताओं ने एक बार फिर से अपनी काबिलियत का परचम लहराया है। भारतीय मूल के तीन प्रतिभावान साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने जुलाई के महीने में एंथ्रोपिक (Anthropic) के क्लाउड का इस्तेमाल करके आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दिग्गज OpenAI के सिस्टम को सफलतापूर्वक हैक कर दिखाया। यह कोई अवैध सेंधमारी नहीं थी, बल्कि एक अधिकृत सिक्योरिटी टेस्ट (Authorized Security Test) था, जिसके जरिए इन रिसर्चर्स ने सॉफ्टवेयर की एक छिपी हुई कमी का फायदा उठाकर कंपनी के सिस्टम की सुरक्षा में सेंध लगाई और सभी को चौंका दिया।
क्लाउड की मदद से हासिल किया प्राइवेट गिटहब तक एक्सेस
यह पूरा प्रोजेक्ट OpenAI के बग-बाउंटी प्रोग्राम (Bug Bounty Program) के तहत उसके सिस्टम में मौजूद सुरक्षा कमियों का पता लगाने के लिए किया गया था। शोधकर्ताओं ने एक खामी ढूंढ निकाली और उसका फायदा उठाने के लिए क्लाउड की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया। इस दौरान उन्होंने ChatGPT बनाने वाली कंपनी के कर्मचारियों के अकाउंट्स और कंपनी के प्राइवेट गिटहब (GitHub) तक अपनी पहुंच बना ली।
इस पूरी टीम में साइबर सुरक्षा स्टार्टअप ‘हैक्ट्रॉन AI’ से जुड़े तीन नाम शामिल हैं—हर्ष जायसवाल, मोहन पेधापति और राहुल मैनी। प्रतिष्ठित मीडिया हाउस ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, OpenAI के प्राइवेट रिपॉजिटरी का एक्सेस हासिल करने के लिए पहली कमजोरी खोजने से लेकर पूरे एक्सपेरिमेंट को अंजाम देने में 72 घंटे से भी कम समय लगा।
कितना आया खर्च और कंपनी से मिला कितने का इनाम?
इस अनोखे और सफल सुरक्षा परीक्षण के दौरान इन शोधकर्ताओं ने AI टोकन पर 3,000 डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 2.5 लाख रुपये से भी कम खर्च किए। इसके बदले में, सिस्टम की इस गंभीर कमजोरी को उजागर करने और कंपनी को सतर्क करने के लिए OpenAI की ओर से इन शोधकर्ताओं को 6,500 डॉलर यानी लगभग 5.5 लाख रुपये का आकर्षक इनाम दिया गया।
इस प्रतिभाशाली टीम के तीनों शोधकर्ताओं का सॉफ्टवेयर की कमियां खोजने, सिस्टम की वल्नरेबिलिटी टेस्टिंग करने और दुनिया भर के बग-बाउंटी प्रोग्राम्स में हिस्सा लेने का कई सालों का लंबा और शानदार अनुभव रहा है, जो एक बार फिर साबित करता है कि भारतीय टेक एक्सपर्ट्स ग्लोबल लेवल पर कितना आगे हैं।
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