अयोध्या: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि अयोध्या की वीरता, गौरव और आध्यात्मिक शक्ति के सामने कोई भी ताकत कभी टिक नहीं सकी। वे बुधवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भगवान रामलला के विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ, प्रतिष्ठा द्वादशी के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर प्रदेशवासियों और देशवासियों को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुख, समृद्धि और मंगल की कामना की। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से अयोध्या ने राम जन्मभूमि आंदोलन के कई चरण देखे हैं।
उन्होंने कहा, “अयोध्या का नाम ही यह दर्शाता है कि यह अजेय नगरी है, जिसकी वीरता और गौरव को कोई भी शत्रु परास्त नहीं कर सकता। लेकिन स्वार्थ, धार्मिक उन्माद और तुष्टिकरण की राजनीति के चलते कुछ शक्तियों ने इस शांत नगरी को अशांति का केंद्र बनाने का प्रयास किया।”
पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके कार्यकाल में अयोध्या में आतंकी हमले तक हुए और पवित्र भूमि को रक्तरंजित करने की साजिशें रची गईं, लेकिन वे सफल नहीं हो सकीं।
उन्होंने 2005 के आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि पीएसी के जवानों ने साहस और तत्परता से आतंकियों को मार गिराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या भगवान हनुमान की कृपा से सुरक्षित है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 11 वर्षों में अयोध्या में हुए ऐतिहासिक कार्यों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने 5 अगस्त 2020 को अयोध्या आकर श्रीराम मंदिर का भूमि पूजन किया। इसके बाद 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई।
उन्होंने बताया कि 25 नवंबर 2025 को विवाह पंचमी के अवसर पर श्रीराम मंदिर के मुख्य शिखर पर सनातन धर्म का ध्वज फहराया गया, जिसने यह संदेश दिया कि सनातन धर्म सदैव सर्वोपरि रहेगा।
मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की भूमिका को भी रेखांकित करते हुए कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन में उनका प्रत्यक्ष योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के संघर्ष के बाद रामलला का भव्य मंदिर में विराजमान होना हर सनातनी के लिए गर्व और भावुक करने वाला क्षण है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले अयोध्या में बिजली, पानी, सड़क, स्वच्छता, सुरक्षा और संपर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। “एक समय ऐसा था जब ‘जय श्रीराम’ बोलने पर लोगों को लाठियां और गोलियां मिलती थीं, लेकिन आज देशभर में ‘जय श्रीराम’ और ‘राम-राम’ के उद्घोष स्वतंत्र रूप से गूंज रहे हैं।”
उन्होंने बताया कि बीते पांच वर्षों में अयोध्या में 45 करोड़ से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए आ चुके हैं। पहले जहां श्रद्धालुओं की संख्या कुछ लाखों में थी, वह अब करोड़ों में पहुंच चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सूर्यवंशी राजधानी अयोध्या अब देश की पहली सोलर सिटी बन चुकी है। यहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, डबल लाइन रेलवे ट्रैक और आधुनिक सड़क नेटवर्क विकसित किया गया है। एक लेन की सड़कों को चार लेन में बदला गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन केवल एक मंदिर निर्माण का विषय नहीं था, बल्कि यह गुलामी के प्रतीकों को मिटाने और आत्मसम्मान को पुनर्स्थापित करने का संघर्ष था। उन्होंने कहा कि यह यात्रा समाप्त नहीं हुई है, बल्कि यह एक नए युग की शुरुआत है, जिसमें विरासत के संरक्षण के साथ विकास के नए मानक स्थापित करने होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हर नागरिक का दायित्व है कि वह राष्ट्र निर्माण में योगदान दे। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि आज़ादी के 100 वर्ष पूरे होने की ओर बढ़ते भारत में सभी मिलकर देश की विरासत, संस्कृति और गौरव की रक्षा करें, ताकि भारत विश्व में एक अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित हो सके।
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