नेहरू आपके नाना-दादा हो सकते हैं, लेकिन वे देश के पहले प्रधानमंत्री थे: निशिकांत दुबे ने लोकसभा में कांग्रेस पर साधा निशाना

New Delhi : लोकसभा में आज (बुधवार) ऑपरेशन सिंदूर पर चल रही चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यों पर सवाल उठाना हर नागरिक का हक है।

 

दुबारा उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर आरोप लगाया कि उन्हें इतिहास का महत्व नहीं पता, जबकि इतिहास से सीख लेकर वर्तमान की चुनौतियों से निपटना आवश्यक है। दुबे ने कहा, “प्रियांका गांधी कह रही हैं कि इतिहास से क्या मतलब? उन्हें समझना चाहिए कि इतिहास से सीखना चाहिए और वर्तमान में जीना चाहिए। नेहरू जी आपके नाना-दादा हो सकते हैं, लेकिन वे इस देश के पहले प्रधानमंत्री थे। इसलिए उनके कारनामों पर सवाल उठाना हर किसी का हक है।”

 

नेहरू की किताब और पाकिस्तान के निर्माण पर निशाना

 

निशिकांत दुबे ने नेहरू की किताब ‘Glimpses of World History’ का जिक्र करते हुए कहा कि इस किताब में महमूद गजनवी और तत्कालीन राजनीतिक घटनाओं का वर्णन है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पाकिस्तान के गठन में दो प्रमुख हस्तियों लीयाकत अली खान और मोहम्मद अली जिन्ना की भूमिका थी। उन्होंने बताया कि नेहरू ने अपनी बहन विजय लक्ष्मी पंडित को पाकिस्तान का राजदूत नियुक्त किया था, जिससे लीयाकत अली इतना नाराज हुए कि उन्होंने भारत के विभाजन की कसम खा ली। दुबे ने कहा कि कांग्रेस की मानसिकता आज भी वैसी ही है।

 

कश्मीर और अनुच्छेद 370

 

लोकसभा में निशिकांत दुबे ने कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू करने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि शेख अब्दुल्ला द्वारा चलाए गए “राजा कश्मीर छोड़ो” आंदोलन और जिन्ना की राजनीतिक हरकतों के कारण कश्मीर के विलय में देरी हुई। “फिर जो समझौता हुआ, वही समस्या का सबब बन गया। यही वजह है कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू करना पड़ा।”

 

कांग्रेस और सेना पर निशाना

 

निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर भारतीय सेना की अवमानना का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि 1972 से 2007 तक सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को पेंशन या सम्मान नहीं मिला। 1962 के युद्ध में कांग्रेस ने नेहरू के चचेरे भाई कौल को असम नेपा का हेड नियुक्त किया, लेकिन अमेरिका और चीन के खिलाफ संघर्ष में असफल होने पर कौल ने भाग लिया। उन्होंने बताया कि नेहरू ने उस युद्ध में वायुसेना का उपयोग नहीं करने दिया।

 

उन्होंने 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में खोए गए एयरक्राफ्ट के आंकड़े सार्वजनिक न करने पर भी कांग्रेस पर सवाल उठाया। इसके अलावा उन्होंने कहा कि 1948 से पाकिस्तान को दिए गए आईएमएफ ऋण पर कांग्रेस कभी विरोध नहीं करती रही, जबकि वर्तमान में भारत ने पहलगाम हमले के बाद इसका विरोध किया।

 

आतंकवाद और सुरक्षा

 

दुबे ने जोर देते हुए कहा कि भाजपा के लिए एक-एक नागरिक महत्वपूर्ण है और सरकार हर आतंकवादी को मिट्टी में मिलाने और पीओके को भारत में शामिल करने के लिए गंभीर है।

 

निशिकांत दुबे के इस भाषण ने लोकसभा में विपक्ष और सरकार के बीच चर्चा को और गरमाया और सदन में राजनीतिक बहस का नया आयाम जोड़ा।

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