इंफाल : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार ने चरित्र, प्रतिबद्धता और सामूहिक उत्तरदायित्व के महत्व पर जोर देते हुए युवाओं से राष्ट्र सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमें “हर क्षण राष्ट्र के लिए जीना चाहिए।”
अरुण कुमार केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (सीएयू), इंफाल के कृषि महाविद्यालय, इरोइसेंबा के सभागार में बुधवार को आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम “द संघ वे: सेवा के 100 वर्ष” विषय के अंतर्गत आयोजित किया गया था।
मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता के रूप में अरुण कुमार ने भारत को एक जीवंत सभ्यता बताते हुए कहा कि इसकी विशेषता इसकी अखंड सांस्कृतिक परंपरा और गहरी सभ्यतागत चेतना है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान भी इसी हजारों वर्षों से विकसित सामूहिक चेतना पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि संघ की सोच में व्यक्ति निर्माण ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। “महान व्यक्ति ही महान राष्ट्र का निर्माण करते हैं,” उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक स्वतंत्रता पर्याप्त नहीं है, जब तक नागरिकों में नैतिक बल, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी न हो।
संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आरएसएस की स्थापना व्यक्ति और समाज के माध्यम से राष्ट्र को संगठित करने के उद्देश्य से हुई थी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समाज एकजुट नहीं रहा तो स्वतंत्रता के बाद भी फिर से परतंत्र होने का खतरा बना रह सकता है।
राष्ट्रीय पुनरुत्थान के मार्ग पर प्रकाश डालते हुए अरुण कुमार ने चरित्र निर्माण के पांच आवश्यक पहलुओं को रेखांकित किया—सभ्यतागत पहचान की समझ, राष्ट्र को सर्वोपरि रखना, एकता और अनुशासन, चुनौतियों के प्रति सजगता और औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों से मुक्ति। उन्होंने कहा कि अपनी विरासत से विश्वास खोने से समाज कमजोर होता है, जबकि पहचान का पुनःबोध सामूहिक संकल्प को मजबूत करता है।
विकसित भारत के लक्ष्य से अपने विचारों को जोड़ते हुए उन्होंने पंच परिवर्तन की अवधारणा पर बल दिया, जिसमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वभाव जागरण और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अनुशासन, कानून के प्रति सम्मान और नागरिक चेतना को मजबूरी नहीं बल्कि गौरव के रूप में देखा जाना चाहिए।
युवाओं को उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने का संदेश देते हुए उन्होंने “एक जीवन, एक मिशन” का सिद्धांत सामने रखा और हर युवा से कम से कम एक सामाजिक समस्या के समाधान के लिए स्वयं को समर्पित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की एकता और प्रगति के लिए समाज के सभी वर्गों के बीच समन्वय और सहयोग आवश्यक है।
संवाद सत्र के दौरान उन्होंने बेरोजगारी के मुद्दे पर भी चर्चा की और कहा कि कृषि, कौशल आधारित कार्यों और उद्यमिता को कमतर आंकने की सामाजिक सोच भी इसका एक कारण है। उन्होंने युवाओं को व्यावहारिक कौशल विकसित करने, रोजगार सृजक बनने और सहकारी आंदोलनों को मजबूत करने की सलाह दी। डिजिटल विकर्षणों पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उन्होंने छात्र जीवन को साधना बताते हुए शारीरिक फिटनेस, मानसिक स्पष्टता और स्वाभाविक प्रतिभाओं के विकास पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव दिया।
कार्यक्रम का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें छात्रों और शिक्षकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएयू के कुलपति प्रो. अनुपम मिश्रा ने की। इसमें विश्वविद्यालय के शिक्षक, छात्र और आमंत्रित अतिथि उपस्थित रहे।
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