Lucknow : उत्तर प्रदेश समेत देशभर की राजनीति में ‘नारी शक्ति’ अब केवल स्लोगन नहीं, बल्कि जीत की गारंटी बन चुकी है। महिला आरक्षण विधेयक (Women’s Reservation Bill) को लेकर संसद में मचे घमासान और इसके तकनीकी रूप से अटकने के बाद भाजपा ने इसे एक बड़े चुनावी हथियार में तब्दील करने की रणनीति तैयार की है। भाजपा इस मुद्दे के सहारे विपक्ष की उस घेराबंदी में जुट गई है, जिससे 2024 के आम चुनाव में महिलाओं के रिकॉर्ड 65.8% मतदान को अपने पक्ष में स्थायी वोट बैंक बनाया जा सके।
भाजपा का नया नारा: “फैसले नारी शक्ति करेगी”
भाजपा ने आगामी राजनीतिक लड़ाई के लिए बेहद आक्रामक स्लोगन और नारे तैयार किए हैं। पार्टी ने साफ संदेश दिया है “सियासत तुम करो, फैसले नारी शक्ति करेगी।” विपक्ष को चेतावनी देते हुए भाजपा ने नारा दिया है कि अब नारी शक्ति न केवल वोट देगी, बल्कि विरोधियों का हिसाब भी करेगी। पार्टी की योजना पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के चुनाव नतीजों के तुरंत बाद देशभर में ‘जनाक्रोश रैलियां’ और पत्रकार वार्ताएं करने की है, ताकि विधेयक का विरोध करने वाले दलों की जनविरोधी छवि पेश की जा सके।
किंगमेकर बनीं महिलाएं: योजनाओं का दिख रहा असर
हालिया विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनाव के नतीजों ने यह पुख्ता कर दिया है कि महिलाएं अब राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में हैं। चुनाव आयोग और एसबीआई रिसर्च के आंकड़े भी इसकी तस्दीक करते हैं। भाजपा की रणनीति की सफलता के पीछे तीन मुख्य स्तंभ माने जा रहे हैं:
कल्याणकारी योजनाओं में मालिकाना हक: राशन कार्ड से लेकर ‘प्रधानमंत्री आवास’ तक में महिलाओं को घर का मुखिया बनाया गया।
उज्ज्वला और आयुष्मान: इन योजनाओं ने सीधे तौर पर ग्रामीण और मध्यमवर्गीय महिलाओं को भाजपा के साथ जोड़ा।
महिला अस्मिता: राजनीति में महिला सम्मान और सुरक्षा को चुनावी मुद्दा बनाकर भाजपा ने महिलाओं को एक स्वतंत्र वोट बैंक के रूप में लामबंद किया है।
रणनीतिक तरकश के तीर: नतीजों का इंतजार
भाजपा नेतृत्व फिलहाल दक्षिण और पूर्वी राज्यों के चुनावी नतीजों की प्रतीक्षा कर रहा है। इसके बाद, पार्टी उन दलों को कटघरे में खड़ा करेगी जिन्होंने संसद में महिला आरक्षण के राह में रोड़े अटकाए। भाजपा की तैयारी इसे एक “ऐतिहासिक धोखे” के रूप में पेश करने की है, जिससे विपक्ष के लिए महिला वोटर्स को साधना मुश्किल हो जाएगा।
पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि जिस तरह ‘तीन तलाक’ और ‘सफाई अभियान’ (शौचालय निर्माण) ने महिलाओं को भाजपा का ‘साइलेंट वोटर’ बनाया था, वैसे ही महिला आरक्षण विधेयक की लड़ाई उन्हें पार्टी का मुखर समर्थक बनाएगी।
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