नई दिल्ली। एनसीपी (NCP) में नेतृत्व और संगठनात्मक ढांचे को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को भेजे गए पत्र के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस पत्र में पार्टी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सूची साझा की गई, जिसमें सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि उनके बेटे पार्थ पवार को महासचिव और जय पवार को राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।
सूत्रों के मुताबिक, इस पत्र को लेकर विवाद तब खड़ा हुआ जब इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के संगठनात्मक पदों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। इससे यह अटकलें तेज हो गईं कि क्या दोनों वरिष्ठ नेताओं को पार्टी संगठन में किनारे कर दिया गया है।
विवाद बढ़ने के बाद सुनेत्रा पवार, पार्थ पवार और जय पवार ने एनसीपी के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे से संपर्क साधा है और उनसे मुलाकात का समय मांगा है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर जल्द ही एक अहम बैठक हो सकती है, जिसमें स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
“तकनीकी गलती” बताकर दी सफाई
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनेत्रा पवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को भेजी गई सूची में कुछ तकनीकी गलतियां थीं और उन्हें जल्द ही सुधार लिया जाएगा। पार्टी की ओर से कुल 22 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सूची आयोग को सौंपी गई है।
इस सूची में कुछ नेताओं को शामिल तो किया गया है, लेकिन उनके औपचारिक संगठनात्मक पदों का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
पहले भी उठे थे सवाल
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की स्थिति सामने आई है। इससे पहले 10 मार्च को जब सुनेत्रा पवार ने अपने अध्यक्ष चुने जाने को लेकर चुनाव आयोग को पत्र लिखा था, तब भी कई वरिष्ठ नेताओं के पदों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था। उस समय भी 14 पदाधिकारियों की सूची में केवल कुछ ही पद स्पष्ट किए गए थे।
इस सूची में छगन भुजबल और दिलीप वलसे-पाटिल जैसे वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया था, लेकिन उनके संगठनात्मक पद नहीं बताए गए थे। इसी तरह प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के पदों का भी स्पष्ट उल्लेख नहीं था।
संगठन में बढ़ी असमंजस की स्थिति
लगातार दो पत्रों में वरिष्ठ नेताओं के पदों को लेकर स्पष्टता न होने से एनसीपी के भीतर असमंजस की स्थिति बन गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल “तकनीकी गलती” नहीं बल्कि संगठनात्मक पुनर्गठन की बड़ी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।
फिलहाल पार्टी की ओर से इस विवाद पर स्थिति साफ करने और आंतरिक मतभेदों को सुलझाने के प्रयास जारी हैं। आने वाले दिनों में होने वाली बैठक को इस पूरे विवाद के समाधान के लिए अहम माना जा रहा है।
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