भारत ने यूएनएससी सुधारों पर आईजीएन बैठक में विस्तार पर दिया जोर

न्यूयॉर्क (रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)। विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में सुरक्षा परिषद सुधारों पर अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) बैठक में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य दिया। जॉर्ज ने परिषद के विस्तार की मांग दोहराते हुए कहा कि वर्तमान संरचना विकासशील देशों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं करती है।
विदेश मंत्रालय ने जॉर्ज के संबोधन से जुड़ा एक आधिकारिक बयान जारी किया, जिसमें बताया गया कि सचिव (पश्चिम) ने सुरक्षा परिषद सुधारों के प्रति भारत के दृष्टिकोण और अफ्रीकी मॉडल के बीच समानताएं रेखांकित कीं। उन्होंने यूएन के मंच पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में ग्लोबल साउथ, विशेष रूप से अफ्रीकी देशों के बेहतर प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर बल दिया। जॉर्ज ने कहा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थानों में सुधार आवश्यक हैं और परिषद के वर्तमान स्वरूप को बदलना समय की मांग है।
इस दौरान उन्होंने यूएनएससी में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की आवश्यकता पर जोर देते हुए तर्क दिया कि सुरक्षा परिषद का वर्तमान ढांचा विकासशील देशों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं करता है। उन्होंने संकेत दिया कि सुधारों को टालना वैश्विक सुरक्षा और शांति के लिए हानिकारक है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा सेक्रेटरी (वेस्ट) ने आईजीएन बैठक में ग्लोबल साउथ के अधिक प्रतिनिधित्व की जरूरत पर जोर दिया, खासकर स्थायी श्रेणी में। उन्होंने यूएन सुरक्षा परिषद में सुधारों को लेकर भारत के दृष्टिकोण और अफ्रीकी मॉडल के बीच की समानताओं को रेखांकित किया।
इसके साथ ही जॉर्ज ने 2026 ईकोसॉक फोरम की आम बहस में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहां उन्होंने एक निष्पक्ष और समावेशी वैश्विक वित्तीय प्रणाली की वकालत की। इस बारे में जानकारी देते हुए प्रवक्ता जायसवाल ने एक अन्य पोस्ट में लिखा सेक्रेटरी (वेस्ट) ने विकास के लिए वित्तपोषण पर 2026 ईकोसॉक फोरम की आम बहस में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य दिया। उन्होंने 4 खरब डॉलर के एसडीजी वित्तपोषण अंतर को पाटने के लिए एक निष्पक्ष, समावेशी और विकास-उन्मुख वैश्विक वित्तीय प्रणाली की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि आईएफआई में सुधार करना, ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करना और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को लागू करना, सेविले प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
यूएन की बैठकों में शामिल होने न्यूयॉर्क के दौरे पर गए जॉर्ज ने इससे इतर संयुक्त राष्ट्र के ऑपरेशनल सपोर्ट विभाग के अवर-महासचिव अतुल खरे के साथ विस्तृत चर्चा की, जिसमें उन्होंने बहुपक्षवाद के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता और संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा में उसके उल्लेखनीय योगदान की पुनः पुष्टि की। इसके अलावा उन्होंने राजनीतिक और शांति-निर्माण मामलों तथा शांति अभियानों के विभागों में मध्य-पूर्व, एशिया और प्रशांत क्षेत्र के सहायक महासचिव खियारी खालिद से भी मुलाकात की। दोनों के बीच विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा हुई, जिसमें संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया।

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